इस अधिनियम के तहत वसूली की प्रक्रिया एक विशेष प्रशासनिक व्यवस्था के तहत चलती है, जिसे कहा जाता है।
इसके अंतर्गत भू-राजस्व, स्थानीय कर, सरकारी बैंकों या ऋण संस्थाओं के बकाया लोन और न्यायालय द्वारा लगाए गए जुर्माने शामिल हैं।
प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद, देनदार को 30 दिनों का नोटिस दिया जाता है कि वह राशि चुकाए या फिर आपत्ति (Objection) दर्ज कराए। This link or copies made by others cannot be deleted
क्या आप इस कानून के तहत तैयार करने का प्रारूप देखना चाहते हैं? Share public link
आज के समय में भी बिहार और ओडिशा में बैंक ऋणों की वसूली (विशेषकर कृषि ऋण या केसीसी), सरकारी बकाये, और विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत दिए गए ऋणों की वसूली के लिए इस अधिनियम का व्यापक उपयोग किया जाता है। जब कोई व्यक्ति या संस्था जानबूझकर सरकारी बकाया नहीं चुकाती, तो जिला प्रशासन इसी अधिनियम के तहत 'सर्टिफिकेट केस' (Certificate Case) दर्ज कर कार्रवाई करता है। निष्कर्ष Try again later
'पब्लिक डिमांड' (सार्वजनिक मांग) का क्या अर्थ है?
दीवानी अदालत (Civil Court) के सामान्य और लंबे कानूनी दांव-पेंच से बचकर सरकारी बकाया वसूलना। including any personal information you added.
इस कानून का मुख्य उद्देश्य सामान्य दीवानी अदालतों (Civil Courts) की लंबी और जटिल प्रक्रिया से बचकर, सीधे राजस्व अधिकारियों (Revenue Officers) के माध्यम से बकाये की वसूली करना है।
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बकायेदार की चल या अचल संपत्ति की कुर्की और नीलामी (Attachment and Sale of Property)।